झारखंड विधानसभा में निजी विद्यालयों की मनमानी पर जोरदार बहस
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 17वें दिन, सोमवार को विधायक रागिनी सिंह ने धनबाद सहित पूरे राज्य में निजी विद्यालयों की मनमानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी नीतियों से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को काफी परेशानी हो रही है।
विधायक रागिनी सिंह ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन नामांकन प्रक्रिया के दौरान पहले ही शुल्क वसूल लेता है, लेकिन इसके बावजूद हर साल अभिभावकों पर वार्षिक शुल्क के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाता है। इससे खासकर मध्यम वर्ग के परिवारों को गंभीर वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कई स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते हैं और अभिभावकों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देते। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई की जाए और एक मजबूत नियामक तंत्र स्थापित किया जाए, जिससे निजी स्कूलों द्वारा की जा रही अवैध वसूली को रोका जा सके।
सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि इस मामले की जांच की जाएगी और यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस मुद्दे पर विधानसभा में अन्य विधायकों ने भी समर्थन जताया और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि स्कूल ड्रेस, किताब, बैग से लेकर जूता तक अपनी एजेंसी से लेने का दबाव निजी विद्यालय बनाते हैं। इसके बदले दुकानों और एजेंसियों से ये अपना हिस्सा वसूलते हैं। हर साल री-एडमिशन के नाम पर निजी स्कूल अभिभावकों का खून चूसते हैं। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री रामदास सोरेन ने बताया कि उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका के आलोक में गठित जांच समिति द्वारा शुल्क संग्रहण को लेकर उचित कानून बनाने के सुझाव के तहत झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 अधिसूचित है।