प्रदोष व्रत 2025: प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान करें इस कथा का पाठ, तभी पूरा होगा व्रत
प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम व्रतों में से एक माना जाता है। इस व्रत को रखने से न केवल जीवन के संकट दूर होते हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि भी बनी रहती है। हिंदू धर्मशास्त्रों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार प्रदोष व्रत 27 मार्च को रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष व्रत की कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए, तभी व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।
गुरुवार, 27 मार्च 2025
प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बेहद पुण्यदायी बताया गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त पूरी श्रद्धा से व्रत करता है और सायंकाल प्रदोष काल में शिव पूजा करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
प्रदोष व्रत कथा
प्राचीन काल की कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब एक निर्धन ब्राह्मण अपने जीवन में अत्यंत दुखी था। वह दिन-रात शिव की आराधना करता था, लेकिन उसे कोई समाधान नहीं मिल रहा था। एक दिन भगवान शिव ने स्वप्न में आकर उसे प्रदोष व्रत करने का आदेश दिया। ब्राह्मण ने विधि-विधान से प्रदोष व्रत रखा और संध्या के समय भगवान शिव की कथा सुनी। व्रत समाप्त होते ही उसके जीवन की सारी परेशानियां दूर हो गईं और वह धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके संकल्प लें।
- पूरे दिन उपवास रखें और केवल फलाहार करें।
- संध्या काल में भगवान शिव का अभिषेक करें और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
- रात्रि में शिव चालीसा और महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
व्रत के लाभ
- प्रदोष व्रत से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- आर्थिक परेशानियां समाप्त होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
- भगवान शिव की कृपा से रोग, भय और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है।
यदि आप भी इस बार प्रदोष व्रत कर रहे हैं, तो पूजा के दौरान विधिपूर्वक इस कथा का पाठ करें, ताकि व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो और भगवान शिव की कृपा बनी रहे।