महाराष्ट्र के 14 वर्षीय आर्यन शुक्ला, जिन्हें 'ह्यूमन कैलकुलेटर' के रूप में जाना जाता है, ने हाल ही में अपनी अद्वितीय मानसिक गणना क्षमताओं से छह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। इनमें से एक उपलब्धि में उन्होंने मात्र 30.9 सेकंड में 100 चार-अंकीय संख्याओं को मानसिक रूप से जोड़ा। उनकी इस असाधारण प्रतिभा ने उद्योगपति आनंद महिंद्रा सहित कई लोगों को प्रभावित किया है।
आर्यन की सफलता का श्रेय उनके निरंतर अभ्यास और अबेकस तथा वैदिक गणित जैसी तकनीकों के अध्ययन को दिया जा सकता है। उन्होंने छह वर्ष की आयु में अबेकस सीखना शुरू किया और तब से मानसिक गणना में रुचि विकसित की। आर्यन विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड में भाग लेते रहे हैं और कई प्रतियोगिताएं जीती हैं।
हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि आर्यन की उपलब्धियाँ उनकी व्यक्तिगत रुचि, समर्पण और वर्षों के अभ्यास का परिणाम हैं। अबेकस और वैदिक गणित जैसी तकनीकों को सीखना निश्चित रूप से बच्चों की गणितीय क्षमताओं को बढ़ा सकता है और उनकी मानसिक गणना में सुधार कर सकता है। हालांकि, प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति और रुचि भिन्न होती है, इसलिए इन तकनीकों को अपनाने से सभी बच्चे आर्यन जैसी विलक्षणता प्राप्त करेंगे, यह आवश्यक नहीं है।
माता-पिता के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने बच्चों की प्राकृतिक रुचियों और क्षमताओं को पहचानें और उन्हें प्रोत्साहित करें। यदि आपका बच्चा गणित में रुचि रखता है, तो अबेकस, वैदिक गणित या अन्य मानसिक गणना तकनीकों का प्रशिक्षण उनकी क्षमताओं को निखारने में सहायक हो सकता है। हालांकि, यह आवश्यक है कि यह प्रक्रिया आनंददायक और दबावमुक्त हो, ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बढ़े और वह अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सके।
अंततः, आर्यन शुक्ला की कहानी प्रेरणादायक है और यह दर्शाती है कि समर्पण और मेहनत से असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं। हालांकि, प्रत्येक बच्चे की यात्रा अद्वितीय होती है, और माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को उनके व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के अनुसार मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करें।